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जहाँ मन दर के बिना है


टैगोर के विश्वास के बारे में, निश्चित नहीं कि वह ईसाई थे। पर वह अपने विश्वास के अनुसार सर्वशक्तिमान ईश्वर से यह प्रार्थना कर रहे थे। यह एक नये और भारत को विकसित करने के उनके दृष्टिकोण को संकेत करता है।